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वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह के तहत कार्यशाला

वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह के तहत कार्यशाला

विश्व आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह पर कार्यशाला का आयोजन

शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आयोडीन जरूरी : डॉ. अखिलेश शर्मा


हनुमानगढ़। वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण सप्ताह के तहत सोमवार को स्वास्थ्य भवन में  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा के निर्देशन में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आयोडीन के पर्याप्त उपयोग एवं आयोडीन की कमी के परिणामों के बारे में जानकारी दी गई। कार्यशाला में नमक के थोक व खुदरा व्यापारियों सहित अन्य दुकानदारों को आयोडीन के बारे में जानकारी दी गई। कार्यशाला में डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अखिलेश शर्मा, आरसीएचओ डॉ. सुनील विद्यार्थी, वरिष्ठ स्वास्थ्य कार्यकर्ता नवाबदीन भाटी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी रफीक मोहम्मद, एएसओ कपिलदेव शर्मा एएसओ विकास चौहान सहित स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। 

डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अखिलेश शर्मा ने बताया कि आयोडीन हमारी सेहत के लिए एक बेहद जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है। शरीर में थायरॉइड फंक्शन को सामान्य रखने तथा शारीरिक और मानसिक विकास के लिए यह जरूरी तत्व है। इसकी कमी से व्यक्ति घेंघा रोग से पीडि़त हो सकता है। दुनिया भर में लोगों को शरीर में आयोडीन की जरूरत और इसकी कमी से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को विश्व आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस मनाया जाता है। हमारे शरीर को आयोडीन मुख्यत: हमारे भोजन में शामिल नमक से मिलता है। शरीर को एक निर्धारित मात्रा में ही प्रतिदिन आयोडीन की जरूरत होती है। इसकी ज्यादा मात्रा नुकसानदेह होती है। 

आरसीएचओ डॉ. सुनील विद्यार्थी ने जानकारी दी कि आयोडीन की कमी से स्वास्थ्य पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों जैसे घेंघा रोग, बच्चों में मानसिक मंदता, अपंगता, गूंगापन, बहरापन, बार-बार गर्भपात तथा गर्भ में शिशु की मृत्यु की रोकथाम, नियंत्रण एवं निवारण के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। आईईसी गतिविधियों के जरिए लोगों को इस बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। गर्भवती महिला में आयोडीन की कमी होने से बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर असर पड़ता है। 

वरिष्ठ स्वास्थ्य कार्यकर्ता नवाबदीन भाटी एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी रफीक मोहम्मद ने जानकारी दी कि बचपन में पूरा पोषण नहीं मिलने के कारण भी बच्चे कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। गर्भावस्था में आयोडीन की कमी बौनापन, मृत शिशु के जन्म या गर्भपात का कारण हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की थोड़ी कमी भी बच्चे की सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। नवाबदीन भाटी ने उपस्थित नागरिकों को एमबीआई किट से नमक में आयोडीन की मात्रा को जांच कर दिखाया गया। कार्यशाला में यूपीएचसी के स्वास्थ्यकर्मी, किरयाना संघ हनुमानगढ़ जंक्शन के अध्यक्ष अशोक व्यास, किरयाना संघ हनुमानगढ़ टाउन के अध्यक्ष सतीश बंसल, मिर्च मसाला यूनियन के अध्यक्ष खट्टूराम सिंधी, नरेश धूडिय़ा एवं किरयाना यूनियन के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। व्यापारियों को मौसमी बीमारियों, लाडो प्रोत्साहन योजना, शुद्ध आहार-मिलावट पर वार, पैलीएटिव केयर, एनसीडी सहित अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।

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