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विश्व मलेरिया दिवस

विश्व मलेरिया दिवस

मलेरिया उन्मूलन के लिए किए जाएंगे नवाचार

राजस्थान बेहतर प्रयासों से राष्ट्रीय स्तर पर मिली कैटेगिरी 1 की श्रेणी 



जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेशभर में मौसमी बीमारियों यथा मलेरिया, डेंगू एवं चिकनगुनिया आदि से बचाव एवं रोकथाम के लिए नियमित रूप से आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इन कदमों से राजस्थान मलेरिया उन्मूलन की दिशा में देश का अग्रणी राज्य है। चिकित्सा विभाग का प्रयास है कि बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं के साथ—साथ नवाचार एवं जनजागरूकता के माध्यम से मौसमी बीमारियों पर और प्रभावी रोकथाम की जाए। इसी दिशा में मलेरिया उन्मूलन के लिए विभाग विभिन्न नवाचारों पर फोकस करेगा। चिकित्सा मंत्री श्री खींवसर ने बताया कि इस वर्ष विश्व मलेरिया दिवस 25 अप्रेल की थीम 'मलेरिया का अंत: पुनर्निवेश, पुनर्कल्पना, पुनर्जागृति' निर्धारित की गई है। यह मलेरिया के उन्मूलन के लिए एक साझा जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि अन्तर्विभागीय समन्वय स्थापित करते हुए विश्व मलेरिया दिवस की थीम के अनुसार मलेरिया उन्मूलन के लिए नए और नवाचारी तरीकों की आवश्यकता पर जोर दिया जाएगा।

 सभी जिलों में एपीआई एक से कम

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मलेरिया उन्मूलन की दिशा में राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर कैटेगिरी—1 की श्रेणी में वर्गीकृत किया है। कैटेगिरी—1 में वे राज्य आते हैं, जिनकी वार्षिक पैरासाइट इन्सीडेंस (एपीआई) 1 से कम हैं। इसी प्रकार राजस्थान के समस्त जिलों में भी एपीआई एक से कम है।  

आईईसी गतिविधियों से रोकथाम के प्रभावी प्रयास

निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि वर्ष 2024 में मलेरिया रोगियों की संख्या 2213 थी, वहीं अब वर्ष 2025 में 25 अप्रेल तक मात्र 59 मलेरिया के केसेज सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि जनसमुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु समुदाय में मलेरिया से बचाव एवं रोकथाम के लिये प्रभावी आईईसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। आगे भी लार्वा प्रदर्शन के द्वारा, ऑडियो-वीडियो सहित अन्य माध्यमों द्वारा आमजन को जागृत कर मलेरिया उन्मूलन की दिशा में सकारात्मक प्रयास सुनिश्चित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 1 अप्रैल से मलेरिया क्रैश कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके तहत एंटी लार्वा, सोर्स रिडक्शन, फोकल स्प्रे एवं फॉगिंग आदि गतिविधियां की जा रही हैं।

हाई रिस्क जिलों में दो चरण में आईआरएस

मलेरिया से ज्यादा प्रभावित एवं हाई रिस्क 9 जिलों में चिकित्सा विभाग की ओर से दो चरण में इंडोर रेजिड्यूअल स्प्रे करवाया जाएगा, ताकि इन जिलों में मलेरिया के प्रसार पर प्रभावी रोकथाम की जा सके। इन जिलों में अलवर, बालोतरा, बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, प्रतापगढ़, सलूंबर, श्रीगंगानगर एवं उदयपुर शामिल हैं।

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