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चिकित्सा विभाग ने मरू प्रकाश पैलिएटिव केयर वाहन किया रवाना

चिकित्सा विभाग ने मरू प्रकाश पैलिएटिव केयर वाहन किया रवाना

चिकित्सा विभाग की पहल: मरू प्रकाश पैलिएटिव केयर वाहन से गंभीर एवं असाध्य रोगों से पीडि़त मरीजों की घर घर मिलेगी चिकित्सीय सेवाएं एवं परामर्श 

जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना



हनुमानगढ़। गंभीर एवं असाध्य रोगों से पीडि़त मरीजों की देखभाल के लिए मरू प्रकाश पैलिएटिव केयर वाहन को जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने शुक्रवार को जिला कलक्ट्रेट परिसर से हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह वाहन घर-घर जाकर मीरजों को आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएं, दवाएं और परामर्श उपलब्ध करवाएगा। उन्होंने मौके पर सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा, पीएमओ डॉ. शंकरलाल सोनी, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अखिलेश शर्मा, डॉ. प्रेम, मल्टीटास्क वर्कर्र संजय खान, अनीश गांधी, त्रिलोकश्वर शर्मा आदि कार्मिक उपस्थित रहे।

सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय पैलिएटिव केयर कार्यक्रम (एनपीपीसी) भारत सरकार द्वारा 2012 में शुरू किया गया एक स्वास्थ्य कार्यक्रम है। राजस्थान सरकार ने गंभीर और असाध्य रोगों से पीडि़त रोगियों को राहत प्रदान करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य उन मरीजों को देखभाल और सहारा देना है, जो जीवन के अंतिम चरण में गंभीर, असाध्य या लाइलाज रोगों से पीडि़त होते हैं। अब रोगियों को इलाज के लिए अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय, स्वास्थ्य विभाग की एक टीम उनके घर जाकर उनका उपचार करेगी।

डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अखिलेश शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम, विशेष रूप से कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, गुर्दे की बीमारी, एड्स, और दीर्घकालिक वसन रोगों जैसे रोगों से पीडि़त मरीजों के लिए है। इसका उद्देश्य इलाज ही नहीं, बल्कि लक्षणों को नियंत्रित कर मरीज़ और उसके परिजनों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाना है। साथ ही बीमारी से ग्रसित मरीज़ों व परिजनों को समझाना, मानसिक शिक्षा देना, बीमारी से जूझने के लिए मरीज़ को तैयार किया जाएगा। टीम की ओर से परिजनों को भी मरीज की देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

मुख्य उद्देश्य 

  1. गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक राहत देना।
  2. स्वास्थ्य प्रणाली में पैलिएटिव केयर को एकीकृत करना।
  3. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं में इस देखभाल को उपलब्ध कराना।
  4. हेल्थ वर्कर्स, डॉक्टरों और नर्सों को प्रशिक्षण प्रदान करना।
  5. मरीजों और उनके परिवार को परामर्श और सहायता देना।

प्रमुख सेवाएं

  1. दर्द निवारण और लक्षण नियंत्रण
  2. मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहायता
  3. घर-आधारित देखभाल
  4. नर्सिंग स्टाफ न केवल रोगियों की स्थिति की जांच करने के लिए बल्कि डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं को सही तरीके से लेने के लिए भी उनके घर जाएगा।
  5. यदि किसी रोगी की स्थिति बिगड़ती है, तो डॉक्टर से परामर्श किया जा सकता है और दवा बदली जा सकती है।
  6. सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सेवाएं पहुंचाना

महत्व

  1. यह कार्यक्रम मरीजों की जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।
  2. यह केवल बीमारी नहीं, बल्कि व्यक्ति और उसके परिवार की समग्र देखभाल पर केंद्रित है।
  3. यह न केवल अस्पतालों, बल्कि घर और समुदाय स्तर पर भी देखभाल सुनिश्चित करता है।

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