युवाओं में बढ़ते नशे की लत
युवाओं में बढ़ते नशे की लत पर व्यंग्यात्मक कविता
कविता शीर्षक "नशे की लत"
देखो आज फिर आया
एक मौत का खत ।।
और कुछ नहीं
आज के युवा और
नशे की ये लत ।।
मार दिए इन्होंने
बापू के अरमान ।।
मां के सपने भी
बन गए शमशान।।
घर से बाहर निकले
कदम गए बहक ।।
ये चरस और गांजा
ये स्मैक की महक।।
ये नशे के इंजेक्शन
ये नशे की गोलियां।।
वो महफिल का सजना
वो दोस्तों की टोलियां।।
जरा सोच भी लेते
हम कहां जा रहे है।।
वो खो दी जवानी
थी ईश्वर की नेमत।।
आज के युवा और
नशे की ये लत।।
बापू के सर पे जो
कर्ज बड़ा भारी है।।
सब औलाद की खातिर
अपनी जमीं जो वारि है।।
मिट गई हस्तियां
बर्बाद महल हो गए।।
जो चिराग थे घर के
किस दुनिया में खो गए।।
लौट आओ घर को
मां की ममता पुकारे।।
आवाज दे बापू
आ जाओ दुलारे।।
तकती बहना राह तेरी
डोली उठाना भाई तू मेरी।।
तुझे याद तो है ना
छोटे भाई की कीमत।।
आज के युवा और
नशे की ये लत।।
है करबद्ध निवेदन
युवा पीढ़ियों से।।
चलो बनके सिकंदर
ना गिराे सीढ़ियों से।।
त्यागो अभी से
बहुत बुरी है ये आदत।।
जानों अर्थ सांसों का
जो प्रभु की है रहमत।।
आज के युवा और
नशे की ये लत।।
लेखक
वेद प्रकाश
कनिष्ठ सहायक
ग्राम पंचायत डबलीखुर्द
ब्लॉक टिब्बी (हनुमानगढ़)

