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राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य माह के तहत कार्यशाला

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य माह के तहत कार्यशाला

मानसिक तनाव को पहचानें, संवेदनशीलता के साथ दें सहयोग : जिला कलक्टर

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य माह के तहत जिला स्तरीय अधिकारियों-कर्मचारियों व स्वयंसेवी संस्थाओं की कार्यशाला आयोजित

हनुमानगढ़। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) के अंतर्गत आयोजित किए जा रहे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य माह के तहत जिले के समस्त सरकारी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों-कर्मचारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं की कार्यशाला का आयोजन मंगलवार प्रात: 11 बजे जिला कलक्ट्रेट सभागार में जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिला स्तर के साथ-साथ वेबेक्स के माध्यम से खण्ड स्तर पर जुड़ें रहें।

कार्यशाला में जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में कार्यस्थल पर बढ़ते तनाव को प्रभावी तरीके से नियंत्रण करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वर्कप्लेस स्ट्रेस मैनेजमेंट के प्रति जागरूक रहने तथा काम के दौरान उत्पन्न होने वाले तनाव को सकारात्मक तरीके से संभालने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके कार्य व्यवहार, कार्यक्षमता और आसपास के लोगों के साथ संबंधों पर भी असर डाल सकता है। इसलिए अधिकारियों-कर्मचारियों को अपने सहकर्मियों के व्यवहार में होने वाले असामान्य बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। जिला कलक्टर ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे, वह लगातार तनाव में नजर आए, चिड़चिड़ापन, उदासी, एकांत में रहने अथवा कार्य में रुचि कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे व्यक्ति के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाते हुए उसका ध्यान रखना और आवश्यकता पडऩे पर उचित सहायता उपलब्ध करवाना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से कहा कि मानसिक तनाव में रह रहे व्यक्ति की पहचान कर उसे अकेला न छोड़ें तथा आवश्यकता महसूस होने पर उसके परिजनों एवं रिश्तेदारों को इसकी जानकारी दें, ताकि समय रहते उसे आवश्यक भावनात्मक सहयोग एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना आज समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 10 सितम्बर से 10 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य माह के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ जिले के सभी विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सभी विभाग अपने-अपने विभागों में कार्मिकों को जागरूक करें और जरूरतमंद को समय पर सहयोग एवं सहायता उपलब्ध करवाएं। उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव, अवसाद और जीवन में आने वाली विभिन्न परेशानियों के कारण बड़ी संख्या में लोग आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाते हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते मानसिक तनाव के संकेतों को पहचानकर व्यक्ति से संवाद किया जाए और उसे भावनात्मक सहयोग दिया जाए तो आत्महत्या की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों और अध्यापकों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। बच्चों और किशोरों के व्यवहार में यदि अचानक बदलाव दिखाई दे, वे परेशान अथवा तनावग्रस्त नजर आएं या किसी समस्या को लेकर चुप रहने लगें, तो परिजनों एवं अध्यापकों को उनसे खुलकर बातचीत करनी चाहिए। उनकी परेशानियों को समझकर उन्हें भावनात्मक सहयोग देना चाहिए तथा आवश्यकता होने पर विशेषज्ञों से परामर्श दिलाना चाहिए।

एनएमएचपी के जिला नोडल अधिकारी डॉ. ओपी सोलंकी ने कहा कि कार्यस्थलों पर कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। कर्मचारियों में अत्यधिक तनाव, व्यवहार में बदलाव, लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन अथवा कार्य में रुचि कम होने जैसे संकेत दिखाई देने पर संवेदनशीलता के साथ उनसे संवाद किया जाए। जरूरतमंद व्यक्ति को अकेला न छोड़ते हुए उसके परिजनों एवं संबंधित विशेषज्ञों तक सहायता पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति और सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। जागरूकता, संवाद और समय पर सहयोग के माध्यम से मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों को बेहतर जीवन की ओर वापस लाया जा सकता है। उन्होंने मनदर्पण कार्यक्रम, गेटकीपर मॉडल एवं टेलीमॉनस नम्बर के बारे में भी जानकारी दी।

कार्यशाला में डीईआईसी सुनील कुमार, डॉ. एसएस गेट, डॉ. एमपी शर्मा, डॉ. स्नेहलता एवं डॉ. काजोल ने मानसिक स्वास्थ्य के अन्य विषयों के बारे में प्रश्क्षिण दिया। ब्रह्मकुमारी आश्रम से विशेष रूप से पहुंची ब्रह्मकुमारी शीला व किरण ने उपस्थिति से मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला का उद्देश्य जिले में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संदेश को आमजन तक पहुंचाना रहा। कार्यशाला में प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान, तनाव प्रबंधन एवं जरूरतमंद व्यक्ति को सहायता उपलब्ध करवाने के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।

यह रहे उपस्थित

जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ, नवनीत शर्मा, उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अखिलेश शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती राज कंवर, एनएमएचपी के जिला नोडल अधिकारी डॉ. ओपी सोलंकी, सीनियर रेजिडेंट साइकेट्री डॉ. काजोल, असिस्टेंट प्रोफेसर साइकेट्री डॉ. स्नेहलता, महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक प्रवेश सोलंकी भारत स्काउट गाइड से दीपक यादव, भारत स्काउट गाइड से मुंशी राम, एनएम पीजी कॉलेज से डॉ. अर्चना गोदारा, जिला समाज कल्याण अधिकारी विक्रम सिंह, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी राजपाल, आयुर्वेद विभाग से डॉ. रामप्रताप, राजस्थान पथ परिवहन निगम से सुरेश कुमार, रामनिवास मांडण, एसकेडी यूनिवर्सिटी से डॉ. आनन्द सिंह, जोधपुर विद्युत वितरण विभाग से रिछपाल सिंह, आबकारी विभाग से रामसहाय जाट, ब्रह्मकुमारी शीला व किरण, सहायक औषधि नियंत्रक अजय सबल, डॉ. मनोज अरोड़ा, डॉ. रवि खीचड़, डॉ. प्रदीप कड़वासरा, डॉ. मनजीत ढाका, आईएमए से डॉ. एमपी शर्मा डॉ. सुखवीर सिंह गेट सहित शिक्षा विभाग, महिला आधिकारिता विभाग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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