चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक
स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्थाएं सुधारें, एचआरपी मामलों पर रखें विशेष निगरानी
लेबर रूम प्रोटोकॉल, मौसमी बीमारियों की रोकथाम और विभागीय योजनाओं की हुई समीक्षा
हनुमानगढ़। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुधवार को टाउन नगर परिषद के मीटिंग हॉल में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पीसीटीएस, आशा सॉफ्ट, ओजस सहित विभिन्न विभागीय कार्यक्रमों, पीआईपी तथा खंडवार प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अखिलेश शर्मा, आरसीएचओ डॉ. सुनील विद्यार्थी, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मुकेश शेखावत सहित समस्त बीसीएमओ, बीपीओ एवं मेडिकल ऑफिसर्स उपस्थित रहे। डीपीओ सुदेश कुमार ने विभागीय कार्यक्रमों की रूपरेखा, पीआईपी एवं खंडवार प्रगति के संबंध में जानकारी दी।
चिकित्सा संस्थानों में व्यवस्थाएं बेहतर बनाने के निर्देश
सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने कहा कि चिकित्सा संस्थान में अनुशासन एवं बेहतर व्यवस्थाएं बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित मेडिकल ऑफिसर एवं सभी कार्मिकों की है। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों का नियमित निरीक्षण करने, साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने, निर्धारित ड्रेस कोड में आने तथा समय पर संस्थान पहुंचकर अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने आरएमआरएस की नियमित बैठकें आयोजित कर इसकी जानकारी जिला स्तर पर देने, उपयोग में नहीं आ रहे उपकरणों को आवश्यकता वाले अन्य चिकित्सा संस्थानों में स्थानांतरित करने, बायो मेडिकल वेस्ट का नियमानुसार संधारण करने तथा फायर सेफ्टी व्यवस्था का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। डॉ. शर्मा ने लेबर रूम प्रोटोकॉल की पालना, दवाइयों की उपलब्धता, मरीजों की आवश्यक जांच, सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता, प्रसव वॉच ऐप एवं टीबी मुक्त भारत ऐप पर नियमित कार्य करने तथा आचार संहिता की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
सितम्बर में 176 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी प्रस्तावित
डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि जिले में सितम्बर माह में 176 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) मामलों में प्रसव प्रस्तावित हैं। उन्होंने सभी बीसीएमओ, मेडिकल ऑफिसर्स एवं स्वास्थ्यकर्मियों को एचआरपी महिलाओं की नियमित काउंसलिंग करने के निर्देश दिए। गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों को दवाइयों, खानपान, प्रसव संबंधी सावधानियों एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया गया। उन्होंने बीसीएमओ को फील्ड विजिट के दौरान ममता कार्ड की जांच करने, संपर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने, एचपीवी वैक्सीनेशन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को लक्ष्य निर्धारित करने तथा निजी अस्पतालों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उजाला क्लिनिक में किशोर-किशोरियों के पंजीकरण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए तैयारियां रखने के निर्देश
डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अखिलेश शर्मा ने मौसमी बीमारियों एवं एनपी-एनसीडी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए मिशन मधुहारी के संबंध में विस्तार से बताया। उन्होंने पैलिएटिव केयर, सस्पेक्ट फैटी लिवर की पहचान, एफआईबी-4, रामाश्रय वार्ड, सिविल वर्क, पीएम-जेएवाई, आयुष्मान आरोग्य योजना, पीएम राहत योजना, दुर्घटना बीमा योजना, हेपेटाइटिस, स्नेक बाइट, स्वाइन फ्लू एवं कुष्ठ रोग सहित विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत आवश्यक वैक्सीन एवं सीरम की उपलब्धता सुनिश्चित करने, प्रचार-प्रसार सामग्री लगाने तथा मरीजों के समुचित उपचार के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए आईईसी गतिविधियां, ड्राई-डे, हैचरी, फॉगिंग, रिजर्व बेड, स्वास्थ्य शिक्षा, गम्बूशिया मछली एवं लेमनग्रास जैसी गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित करने के निर्देश दिए गए।
एएनसी, टीकाकरण एवं एचआरपी की खंडवार प्रगति की समीक्षा
आरसीएचओ डॉ. सुनील विद्यार्थी ने एएनसी, डिलीवरी, टीकाकरण, एचआरपी, संस्थागत प्रसव एवं एचपीवी वैक्सीनेशन की खंडवार प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने गर्भधारण के पश्चात महिलाओं के टीकाकरण की स्थिति की जानकारी लेते हुए आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मुकेश शेखावत ने टीबी कार्यक्रम के तहत संचालित सौ दिवसीय अभियान की खंडवार प्रगति से अवगत कराया।
डीपीओ सुदेश कुमार ने 12 माह एएनसी, एचआरपी की पहचान, स्तनपान, एनबीएसयू, आरकेएसके, आरबीएसके, खंडवार आयोजित होने वाले स्वास्थ्य शिविर, पीआईपी, आम पोर्टल पर नियमित ऑनलाइन एंट्री तथा 104/108 एम्बुलेंस सेवा सहित अन्य विभागीय कार्यक्रमों की जानकारी दी। बैठक में चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध दवाइयों, मरीजों की जांच, विभिन्न ऐप्स पर ऑनलाइन एंट्री, स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति एवं संस्थागत व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
