जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण संशोधन
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026: 1 अक्टूबर से लागू हुए विलंबित पंजीकरण के नए नियम
घटना के दो वर्ष से अधिक विलम्बित प्रकरण में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर होगा रजिस्ट्रीकृत
हनुमानगढ़। भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) के निर्देशानुसार जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 की अधिसूचना के प्रावधान 1 अक्टूबर, 2026 से लागू हुए है। जिला कलक्टर व जिला मजिस्ट्रेट डॉ. खुशाल यादव ने इस संबंध में आदेश जारी कर संबंधित अधिकारियों को नए संशोधनों को लागू करने के लिए निर्देश जारी किए हैं।
सांख्यिकी उप निदेशक डॉ. ममता बिश्नोई ने बताया कि 'जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026' की धारा 13 (3) में संशोधन किया गया है। संशोधन के तहत किसी जन्म या मृत्यु की घटना, जिसकी विलंबित इत्तिला उसके घटित होने के एक वर्ष के बाद लेकिन 2 वर्ष के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है, वह केवल जिला मजिस्ट्रेट, उप-खंड मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट, जिसके क्षेत्राधिकार में ऐसी जन्म या मृत्यु की घटना घटित हुई है, के द्वारा जन्म मृत्यु की शुद्धता के सत्यापन करने के पश्चात किए गए आदेश पर और विहित फीस दिए जाने पर ही रजिस्ट्रीकृत की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि इसी क्रम में धारा 13 (3ए) के तहत यदि किसी जन्म या मृत्यु की घटना, जिसकी विलंबित इत्तिला उसके घटित होने के दो वर्ष के बाद रजिस्ट्रार को दी जाती है, वह केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिसके क्षेत्राधिकार में ऐसी जन्म या मृत्यु की घटना घटित हुई है, के द्वारा जन्म— मृत्यु की शुद्धता के सत्यापन करने के पश्चात किए गए आदेश पर और विहित फीस दिए जाने पर ही रजिस्ट्रीकृत की जाएगी।
डॉ. बिश्नोई ने बताया कि इस संबंध में जिला कलक्टर ने उपखंड अधिकारियों, कार्यपालक मजिस्ट्रेटों, तहसीलदारों और नगर परिषद, नगरपालिका तथा ग्राम पंचायतों के रजिस्ट्रारों को नए नियमों की अनिवार्य रूप से पालना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।


