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राजसखी मेले का समापन, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

राजसखी मेले का समापन, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

राजसखी मेले का भव्य समापन: महिलाओं की आत्मनिर्भरता को मिला नया आयाम




हनुमानगढ़। श्री खुशालदास विश्वविद्यालय में 8 से 11 मार्च तक आयोजित राजसखी मेले का मंगलवार को भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर काना राम ने कार्यक्रम को संबोधित करते महिला सशक्तिकरण की दिशा में राजीविका की भूमिका की सराहना की। जिला कलेक्टर ने अपने संबोधन में राजीविका से जुड़ाव का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि बारां जिले में आईएएस प्रशिक्षु रहते हुए उन्होंने राजीविका में डीपीएम (डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट मैनेजर) का कार्यभार संभाला था, जिससे उन्हें महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्यों को नजदीक से देखने और समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि जिले में राजीविका के माध्यम से निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलेगी। साथ ही, उन्होंने महिलाओं को अपने उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग और मार्केटिंग पर ध्यान देने की सलाह दी ताकि वे बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकें। जिला कलेक्टर ने राजसखी पोर्टल का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक बेहतर ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म है, जिससे महिलाओं को मेले में स्टॉल लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और वे अपने उत्पादों को ऑनलाइन बेच सकेंगी। समापन समारोह में जिला परिषद सीईओ ओपी बिश्नोई, बाबूलाल जुनेजा, दिनेश जुनेजा, एसीईओ सुनील कुमार छाबड़ा, हकीकत राय चूघ, गिरीश, राम अवतार मीणा, जगतार सिंह, नितिन चुघ, डीपीएम वैभव अरोड़ा और नीतू अरोड़ा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्साहवर्धन के लिए आकर्षक उपहार

मेले में खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें प्रथम पुरस्कार के रूप में मीनल को एलईडी टीवी मिला। द्वितीय पुरस्कार के रूप में रमा को वॉशिंग मशीन, तृतीय पुरस्कार के रूप में मिक्सर जूसर का वितरण किया गया। 

स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की जुबानी...आत्मनिर्भर बनने की कहानी

1.बीघा दादा स्वयं सहायता समूह, तेजरासर


समूह की सदस्य जन्नत ने बताया कि वह 2018 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। पहले उन्हें समाज से ताने सुनने पड़े, लेकिन आज वही लोग उनके साथ काम करना चाहते हैं। सिलाई से शुरुआत करने के बाद उन्होंने बाजरे के बिस्किट जैसे नए उत्पाद बनाए और इस साल 2 लाख रुपए से अधिक की बचत की।

2.जीण माता स्वयं सहायता समूह, कुचामन, नागौर


समूह की सदस्य सुमन ने बताया कि 2016 में झालावाड़ से आई सात बहनों ने यह समूह बनाया था। शुरुआत में एलोवेरा उत्पाद बनाए और पहली बार उदयपुर मेले में भाग लिया, जहां उन्होंने 20,000 रुपए की कमाई की। अब उनके उत्पादों की सीरीज बढ़कर 7 से अधिक हो गई है और इस मेले में उन्होंने 55,000 रुपए की बिक्री की।

3.श्रीराम स्वयं सहायता समूह, संगरिया

समूह की सदस्य ताराबंती ने 2017 में समूह से जुड़कर ब्यूटी पार्लर का निशुल्क कोर्स किया और आज 30 से 35 हजार रुपए प्रति माह की आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह से 2 लाख का लोन लेकर चप्पल बनाने की मशीन खरीदी और पहली बार किसी मेले में स्टॉल लगाकर 30,000 रुपए की कमाई की।



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