नया साल 2026 पर खास कविता
कविता शीर्षक "नया साल"
पल पल गुजरते लम्हों के संग
देखो बीत गया एक साल।।
किसी ने पाई अपनी मंजिल
किसी ने पाई खुशियां हजार।।
कोई तरस गया रोटी को
तो कोई भर गया धन के भंडार ।।
किसी को बिछड़े मिले होंगे
किसी ने अपनों को खोया होगा।।
आंसू खुशी के छलके कहीं
तो कोई चीखके रोया होगा।।
अपनों के धोखे से कोई
नींद मौत की सोया होगा।।
कहीं बच्चों ने विलाप किया
कहीं नारी ने सिंदूर खोया होगा।।
कहीं बाप से बेटा जुदा हुआ
कहीं मां ने लाल खोया होगा।।
कहीं बहन बिछड़ गई भाई से
कोई दोस्त जिगरी के लिए रोया होगा।।
नया साल है, नई उम्मीदें
हम फिर नव वर्ष मनाएंगे ।।
दिल सबके जो रोशन कर दे
वो चिराग कहां से लाएंगे?।।
सटी दीवार भाई की भी
अब कोसों दूर सी लगती है ।।
देख तरक्की दोस्त की भी
क्यों मन में आग सुलगती है।।
तीज त्यौहार सब फीके से है
ये क्या खाक विकास हुआ?।।
घुटन भरे जीवन सभी के
देखो कैसा विनाश हुआ।।
मान- सम्मान बुजुर्गों के अब
बहुत पुरानी बात हुई ।।
तार तार अब रिश्ते सारे
आम खास सी बात हुई।।
कैसे मनाऊं साल नया मैं
एक अजीब सी उलझन है।।
समय की मारा मारी सबको
व्यस्त सबका जीवन है ।।
फिर भी अरदास करूं ईश्वर से
प्रेम प्यार वो वापिस दे
जीवन बीते हंसी खुशी से
काम क्रोध तू वापिस ले।।
छोड़ सकूं मैं छाप दिलों पे
ऐसी प्रभु कृपा करना
भूखे पेट ना सोए कोई
पीड़ा मालिक सबकी हरना ।।
पग की लाज रहे पाबू की
फिर तो साल मनाऊं मैं
नम ना हो मेरी मां की आँखें
फिर तो मंगल गाउं मैं ।।
अमर सुहाग हर नारी का हो
भाई पे मर मिट जाऊं मैं।।
ईश्वर अल्लाह अलग नहीं है
वाहेगुरु भी इनको बुलाऊं मैं ।।
मानव-मानव में भेद कहां है
ये सबको समझाऊं मैं ।।
घात ना करना अपनों के संग
सबको कसम खिलाऊं मैं।।
डगर कठिन है, कांटे राहों में
आंधी में दीप जलाऊं मैं।।
उत्तम कल की आशाओं संग
अमर गीत लिख जाऊं मैं।।
डोरी फिर विश्वास की लेकर
ये नया साल मनाऊं मैं।।
लेखक: वेद प्रकाश, कनिष्ठ सहायक
ग्राम पंचायत डबलीखुर्द
ब्लॉक टिब्बी(हनुमानगढ़)

