वॉल माउंटेड मिनी लाइब्रेरी से बच्चों में पढ़ने की आदत हुई विकसित
सपनों की उड़ान: हनुमानगढ़ जिले के 100 शिक्षण संस्थानों में वॉल माउंटेड मिनी लाइब्रेरी
बच्चों में पढ़ने की आदत हुई विकसित
हनुमानगढ़। जिले के शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम से इतर ज्ञान-वर्धन और पढ़ने की आदत को मजबूत करने की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल साकार हुई है। जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव के मार्गदर्शन और सतत प्रयासों से मुंबई स्थित रत्नानिधि चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा जिले की 100 शैक्षणिक संस्थाओं में “सपनों की उड़ान—वॉल माउंटेड मिनी लाइब्रेरी” की स्थापना की गई है। यह पहल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
गौरतलब है कि इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए 9 दिसंबर, 2025 को रत्नानिधि चेरिटेबल ट्रस्ट और हनुमानगढ़ जिला प्रशासन के मध्य मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। एमओयू के अनुरूप जिले के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से मिनी लाइब्रेरी स्थापित की गई।
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी श्री पन्नालाल कड़ेला ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा जिले के 86 विद्यालयों तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के 14 छात्रावासों में वॉल माउंटेड मिनी लाइब्रेरी लगाई गई है। उपखंडवार वितरण के अनुसार भादरा में 14, नोहर में 38, हनुमानगढ़ में 2, रावतसर में 28, पीलीबंगा में 3 तथा संगरिया में 1 विद्यालय में इन लाइब्रेरीज की स्थापना की गई है।
उन्होंने बताया कि जिले के हनुमानगढ़, टिब्बी, पीलीबंगा और संगरिया के कई विद्यालयों में टाटा ट्रस्ट की ओर से पहले से ही इसी पैटर्न पर लाइब्रेरी संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों को छोड़कर अन्य 86 विद्यालयों में यह नई वॉल माउंटेड मिनी लाइब्रेरी सुविधा विकसित की गई है, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।
ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री राजीव मेहता ने बताया कि इस मिशन के तहत प्रत्येक विद्यालय में जूट के हैंगिंग बैग के साथ 50 चयनित पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं, जिन्हें बच्चों की आसान पहुंच में स्थापित किया गया है। ये पुस्तकें वैज्ञानिकों, साहित्यकारों, आर्थिक रणनीतिकारों, स्वतंत्रता सेनानियों तथा विशेष योगदान देने वाले महापुरुषों के जीवन और स्टोरी टेलिंग पर आधारित सामान्य अंग्रेजी संस्करण में हैं।
उन्होंने कहा कि इन पुस्तकों से विद्यार्थियों की वोकैबलरी, सामान्य ज्ञान और पठन क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही, देश के गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों की जीवनियों से बच्चों को प्रेरणा मिलेगी। यह पहल न केवल शिक्षा को रोचक बनाएगी, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को भी प्रोत्साहित करेगी।

