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मौसम परिवर्तन पर किसान की पीड़ा को कविता के माध्यम से बताया

मौसम परिवर्तन पर किसान की पीड़ा को कविता के माध्यम से बताया

कविता रो शीर्षक "किसान री पीड़ा"


डट ज्या दाता अब रोक ले

              सब तेर हाथ म डोर।।

क्यू बणग्यो बेरी मालका 

        म आगहि भोत कमजोर।।

किसान खड़यो खेत म 

             देखह दाता रो रूप।।

बिन‌ मौसम ओ बरसणो

         अब लागह बडो कुरूप।।

जद तू ही बैरि बण बैठ्यौ 

 फेर म की स्यू अब आस करूं।।

है तू जगत को तारणहार

    म किया ओह विश्वास करूं।।

ओळा सीनो छलनी करग्या

  आन्धी म आशा ऊड गी मेरी।।

तू राम स्यू रावण किया बण्यो

      बता मालिक के मर्जी तेरी।।

म न्यौ पुराणो किया करु

      खेती म दाणो होयो कोनी।।

हर बार भरोसो टूट रयो है

          जैब म धैलो रेयो कोनी।।

बिन मौत मरण स्यू बचा लेई 

        अब म तो प्रभु हार गयो।।

मेरी पीड़ा सुण लेई मालका 

      तेर दर म सौ-सौ बार गयो।।

किसान री पीड़ा दिखांती आ कविता चौखी लागि होव तो‌ सब न पुगती कर ज्यो।। ई अरदास र  साथह मालिक सब रो भलो करह।।

      ये कविता ई मानस के कहने पर श्री वेदप्रकाश ने किसानो की पीड़ा शीर्षक कविता      

  लेखक

  वेद प्रकाश, कनिष्ठ सहायक

 टिब्बी (हनुमानगढ़) स्यू

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