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हनुमानगढ़ में स्वच्छता कार्यशाला

हनुमानगढ़ में स्वच्छता कार्यशाला

राजस्थान को देश दुनिया में स्वच्छता का आइकन बनाने अधिकारी और जनता जागे और जगाए: श्री के के गुप्ता

हनुमानगढ़ में स्वच्छता कार्यशाला में गूंजा 'स्वच्छ राजस्थान : स्वच्छ हनुमानगढ़' का संकल्प

हनुमानगढ़। स्वायत्त शासन विभाग, राजस्थान सरकार के अंतर्गत स्वच्छ भारत मिशन (शहर) 2.0 के तहत प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर श्री के.के. गुप्ता ने नगर परिषद सभागार में आयोजित स्वच्छता कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और नागरिक दायित्व का अभिन्न हिस्सा है। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के सपने को साकार करने के लिए हर नागरिक को अपने घर, मोहल्ले और शहर को कचरा-मुक्त बनाने के लिए सतत प्रयास करने होंगे।

उन्होंने विश्वास जताया कि हनुमानगढ़ जिले की जनता की सक्रिय भागीदारी तथा अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत से यह जिला राजस्थान का स्वच्छतम जिला बन सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-आंदोलन है, जिसमें सभी की भागीदारी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री महोदय का संकल्प है : स्वच्छ, समृद्ध और विकसित राजस्थान

श्री गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा का लक्ष्य राजस्थान को स्वच्छ, समृद्ध और विकसित बनाना है, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश के समझौते हुए हैं, जिनमें से कई परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वच्छता के प्रति बेहद गंभीर हैं और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य स्तर से लेकर स्थानीय निकायों तक निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है तथा कार्यों की नियमित समीक्षा हो रही है।

श्रेणियों के आधार पर होगा स्वच्छता कार्यों का पर्यवेक्षण

उन्होंने बताया कि निकायों को स्वच्छता कार्यों के आधार पर चार श्रेणियों—ए, बी, सी और डी—में विभाजित किया गया है। ए श्रेणी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले निकाय हैं, बी में संतोषजनक, जबकि सी और डी श्रेणी में सुधार और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता वाले निकाय शामिल हैं।

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से धरती माता का श्रृंगार

श्री गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण हमारे सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े हैं। स्वच्छ वातावरण न केवल स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि यह हमारी आस्था और जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के माध्यम से धरती को स्वच्छ रखना हम सबका कर्तव्य है।

स्वच्छता के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु दिए महत्वपूर्ण निर्देश

कार्यशाला में स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने के लिए व्यापक जन-जागरूकता पर जोर दिया गया। घर-घर से कचरा संग्रहण, गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण, नियमित सफाई और निर्धारित समय पर कचरा उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। खाली भूखंडों की सफाई, प्लास्टिक रोकथाम अभियान, आवारा पशुओं की व्यवस्था और पार्कों के विकास पर भी बल दिया गया। साथ ही, 24 घंटे शिकायत व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई, अवैध गतिविधियों पर रोक तथा निर्माण कार्यों की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। शहरी विकास से जुड़े कार्यों में भी आधारभूत सुविधाएं पूर्ण होने के बाद ही स्वीकृति देने पर जोर दिया गया।कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री उम्मेदी लाल मीना, नगर परिषद आयुक्त श्री सुरेंद्र यादव सहित विभिन्न निकायों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


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