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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में हृदय रोग से मासूम को मिली निजात

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में हृदय रोग से मासूम को मिली निजात

तीन वर्षीय खुशाल को मिला नया जीवन, जन्मजात हृदय रोग से जंग जीतकर लौटी मुस्कान

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की बड़ी सफलता

हनुमानगढ़। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जिले में एक नन्हें बच्चे को जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित होने की समय पर पहचान, उचित उपचार और नि:शुल्क हृदय सर्जरी के माध्यम से नया जीवन मिला है। ब्लॉक टिब्बी के गांव डबली कलां के चक 4 आरपी निवासी तीन वर्षीय खुशाल पुत्र शिवचरण की जन्मजात हृदय रोग की सफल सर्जरी 30 मई 2026 को सत्य साईं संस्थान, पलवल में सम्पन्न हुई। अब खुशाल स्वस्थ है और सामान्य बच्चों की तरह जीवन जीने की ओर अग्रसर है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि आरबीएसके अंतर्गत ब्लॉक टिब्बी में कार्यरत मोबाइल हेल्थ टीम-ए द्वारा गत 25 मार्च 2026 को आंगनबाड़ी केन्द्र 4 आरपी डबली कलां में नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान खुशाल की स्क्रीनिंग की गई। जांच के समय टीम को बच्चे में जन्मजात हृदय रोग के लक्षण दिखाई दिए। इसके बाद उसे आवश्यक पुष्टि एवं विशेषज्ञ जांच के लिए उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया। डॉ. शर्मा ने बताया कि खुशाल का परिवार खेती-बाड़ी पर निर्भर है। आर्थिक रूप से सामान्य परिवार के लिए हृदय सर्जरी का खर्च वहन करना अत्यंत कठिन था। ऐसे में आरबीएसके उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया। जिला अस्पताल में संचालित  डीईआईसी (डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर) के माध्यम से बच्चे की सभी आवश्यक जांचें, विशेषज्ञ परामर्श तथा नि:शुल्क ईको जांच करवाई गई। साथ ही परिवार को बीमारी, उपचार प्रक्रिया एवं सर्जरी से संबंधित समस्त जानकारी उपलब्ध करवाई गई। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह पर बच्चे को सत्य साईं संस्थान, पलवल भेजा गया, जहां आधुनिक डिवाइस क्लोजर तकनीक से सफल हृदय सर्जरी की गई। सर्जरी पूरी तरह नि:शुल्क रही, जिससे परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं

डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि खुशाल की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि बच्चों की समय पर स्वास्थ्य जांच हो जाए, तो गंभीर बीमारियों का भी सफल उपचार संभव है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव जाकर बच्चों की जांच कर रही है। खुशाल की जांच के दौरान ही उसके हृदय रोग की पहचान हुई और यही पहचान आगे चलकर उसके जीवन को बचाने का आधार बनी। खुशाल के पिता शिवचरण ने बताया कि उन्हें पहले बच्चे की बीमारी की गंभीरता का अंदाजा नहीं था। अक्सर बच्चा जल्दी थक जाता था और सामान्य बच्चों की तरह सक्रिय नहीं रह पाता था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब बीमारी की पहचान कर उचित मार्गदर्शन दिया तो परिवार को राहत मिली। आज सफल सर्जरी के बाद बच्चे के स्वास्थ्य में निरंतर सुधार हो रहा है और परिवार ने स्वास्थ्य विभाग तथा चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया है।

टीमवर्क से मिली सफलता

डॉ. शर्मा ने बताया कि बीसीएमओ डॉ. रितिका पारीक के सतत पर्यवेक्षण तथा मोबाइल हेल्थ टीम के आयुष चिकित्सक डॉ. जगदीश चन्द्र शर्मा एवं एएनएम सुश्री मोनिका का विशेष सहयोग रहा। उनकी सजगता और समय पर की गई स्क्रीनिंग के कारण बच्चे की बीमारी का प्रारम्भिक स्तर पर पता चल सका। डीईआईसी कॉर्डिनेटर सुनील शर्मा के प्रयास से सत्य साईं संस्थान से खुशाल का ऑपरेशन सही समय पर हो पाया। खुशाल की सफल सर्जरी इस कार्यक्रम की प्रभावशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो यह संदेश देती है कि समय पर जांच और उपचार से बच्चों का भविष्य सुरक्षित बनाया जा सकता है। नन्हें खुशाल की मुस्कान आज केवल उसके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी की मेहनत और समर्पण की भी सबसे बड़ी सफलता है।

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