बोगस विक्रय की जांच जारी,
समर्थन मूल्य पर गेहूं के बोगस विक्रय की जांच जारी,
215 आढ़तियों और 546 व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट
हनुमानगढ़। समर्थन मूल्य पर वर्ष 2026-27 में गेहूं खरीद के दौरान एमएसपी प्रोक्योरमेंट राजस्थान पोर्टल पर बोगस दस्तावेज अपलोड कर अनुचित लाभ प्राप्त करने वाले भूमिधारकों, बटाईदारों एवं आढ़तियों के खिलाफ जांच लगातार जारी है। अब तक 280 प्रकरणों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 215 आढ़तियों और 546 व्यक्तियों की भूमिका सामने आई है।
यह जानकारी देते हुए क्षेत्रीय उपनिदेशक कृषि विपणन विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि हनुमानगढ़ जंक्शन, हनुमानगढ़ टाउन, संगरिया, टिब्बी, पीलीबंगा, रावतसर, गोलूवाला, जाखड़ावाली और तलवाड़ा सहित विभिन्न मंडियों में हुए गेहूं विक्रय की जिला प्रशासन एवं मंडी समितियों द्वारा गहन जांच की जा रही है।
उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया है कि कई व्यक्तियों ने जाली, कूटरचित एवं अवांछित दस्तावेज तैयार कर एक से अधिक बार पंजीकरण करवाते हुए समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचकर अनुचित लाभ प्राप्त किया। इसके कारण वास्तविक किसानों, बटाईदारों एवं आढ़तियों को नुकसान उठाना पड़ा।
जांच में अब तक 240 प्रकरणों में 215 आढ़तियों तथा भूमिधारक एवं बटाईदार के नाम पर 546 व्यक्तियों द्वारा 58,710 क्विंटल गेहूं का बोगस दस्तावेजों के माध्यम से विक्रय किया जाना सामने आया है। यह गेहूं विभिन्न एजेंसियों—नैफेड, एफसीआई, तिलम संघ एवं आरएसएफसीएससी—के माध्यम से खरीदा गया।
उपनिदेशक ने बताया कि सभी दोषी आढ़तियों के खिलाफ राजस्थान कृषि उपज मंडी नियम, 1963 के नियम-71 के तहत अनुज्ञापत्र निलंबन की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। संबंधित मंडियों के प्रशासकों द्वारा आरोप पत्र जारी किए जा रहे हैं। वहीं, जिन व्यक्तियों ने किसान एवं बटाईदार के नाम पर अनुचित लाभ प्राप्त किया है, उनके प्रकरण जिला रसद अधिकारी को नोटिस जारी करने एवं आगे की कार्रवाई के लिए भेजे जा रहे हैं।
अब तक कृषि विपणन विभाग द्वारा 77 नोटिस जारी किए जा चुके हैं तथा 39 प्रकरणों में राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में केविएट भी दायर की जा चुकी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रकरणों की विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ सक्षम स्तर पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
