राष्ट्रीय पल्स पोलियो दिवस
28 जून को जिले के 1276 बूथों पर पिलाई जाएगी पोलियो रोधी दवा, 2.53 लाख से अधिक बच्चों को मिलेगा सुरक्षा कवच
बूथ पर पिलाई जाने वाली दवा सर्वाधिक गुणवत्ता वाली होती है, सभी अभिभावक बच्चों को जरूर लाएं
हनुमानगढ़। राष्ट्रीय पल्स पोलियो दिवस (एनआईडी) के तहत रविवार, 28 जून को जिलेभर में सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक 1276 पोलियो बूथों पर 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जाएगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने अभियान की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा ने जिले के सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को नजदीकी पोलियो बूथ पर अवश्य लेकर आएं, क्योंकि बूथ पर पिलाई जाने वाली पोलियो की दवा सर्वाधिक गुणवत्ता वाली होती है और प्रत्येक बच्चे तक सुरक्षित रूप से पहुंचाई जाती है।
सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि इस विशेष अभियान के तहत जिले के 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के अनुमानित 2 लाख 53 हजार 444 बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 973 तथा शहरी क्षेत्रों में 303 बूथ स्थापित किए गए हैं। अभियान के सफल संचालन के लिए 5104 वैक्सीनेटर तथा उनकी निगरानी के लिए 246 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि अभियान के पहले दिन 28 जून को सभी बच्चों को पोलियो बूथों पर दवा पिलाई जाएगी, जबकि दूसरे एवं तीसरे दिन स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर ऐसे बच्चों को दवा पिलाएंगी जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच पाएंगे। अभियान के दौरान घुमंतू एवं प्रवासी परिवारों के बच्चों पर विशेष फोकस रहेगा। विशेष रूप से गाडिय़ा लौहार, मनिहार, पत्थर तराशने वाले मजदूर, भवन निर्माण श्रमिक तथा ईंट-भट्टों पर कार्यरत श्रमिकों के बच्चों तक पहुंचकर उन्हें पोलियो रोधी दवा पिलाई जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।
डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि बूथों पर अधिक से अधिक बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सभी ब्लॉक चिकित्सा अधिकारियों एवं चिकित्सा अधिकारी प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में माइक से प्रचार-प्रसार कराने तथा प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर बैनर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान को सफल बनाने में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग, आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वयंसेवी संगठन तथा सामाजिक संस्थाएं सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से रविवार को उन सभी विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों को खुला रखा जाएगा, जहां पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा एनसीसी, एनएसएस एवं स्काउट-गाइड के स्वयंसेवक भी छोटे बच्चों को बूथ तक लाने में सहयोग करेंगे।
एक भी बच्चा छूटा, तो बना रहेगा खतरा
जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी (आरसीएचओ) डॉ. सुनील विद्यार्थी ने बताया कि भारत ने वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त राष्ट्र का दर्जा प्राप्त किया था और तब से देश में पोलियो का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि भारत के पड़ोसी देशों अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अभी भी पोलियो वायरस मौजूद है, इसलिए सतर्कता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि एक भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित रह जाता है तो संक्रमण का खतरा बना रहता है। इसलिए प्रत्येक अभिभावक, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, स्वयंसेवी संगठन एवं समाज के जागरूक नागरिकों का दायित्व है कि वे अपने आसपास के सभी 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो बूथ तक पहुंचाकर दवा अवश्य पिलवाएं। डॉ. विद्यार्थी ने कहा कि 'हर बच्चे को हर बार पोलियो की दो बूंदÓ का संकल्प ही भारत को स्थायी रूप से पोलियो मुक्त बनाए रखने की सबसे बड़ी गारंटी है।

