प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
एनीमिया से जंग में 'एफसीएम' बना सहारा, 8 माह में 7 हजार 451 गर्भवती व प्रसूताओं को मिला उपचार
पीलीबंगा में सर्वाधिक 1697 एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए
हनुमानगढ़। गर्भावस्था के दौरान होने वाली खून की कमी (एनीमिया) को नियंत्रित करने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के माध्यम से हाई रिस्क गर्भवतियों की समय पर पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। गंभीर एनीमिया से पीडि़त महिलाओं के लिए फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन प्रभावी उपचार के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि प्रत्येक माह 9, 18 एवं 27 तारीख को आयोजित होने वाले पीएमएसएमए अभियान के दौरान गर्भवती महिलाओं की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की जाती है। जांच में जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर निर्धारित मानक से काफी कम पाया जाता है, उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह के अनुसार एफसीएम इंजेक्शन लगाए जाते हैं। एफसीएम इंजेक्शन शरीर में आयरन की कमी को कम समय में पूरा करने का प्रभावी माध्यम है। इससे हीमोग्लोबिन स्तर में तेजी से सुधार होता है, जिससे गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं का जोखिम कम होता है और गर्भस्थ शिशु के स्वस्थ विकास में भी सहायता मिलती है। साथ ही उनकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाती है।
डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि 1 दिसंबर 2025 से 26 जुलाई 2026 तक जिले में 7451 महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए हैं। इनमें 5908 गर्भवती महिलाओं (एएनसी) तथा 1543 प्रसूता एवं स्तनपान कराने वाली माताओं (पीएनसी) को उपचार प्रदान किया गया। विभाग का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान एनीमिया की जटिलताओं को कम कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है। जिले में एफसीएम उपचार का सर्वाधिक लाभ पीलीबंगा क्षेत्र में मिला, जहां 1697 महिलाओं को इंजेक्शन लगाए गए। इसके अलावा टिब्बी में 1029, एसडीएच भादरा में 915, रावतसर में 671, हनुमानगढ़ ब्लॉक में 661, भादरा में 637, संगरिया में 559, नोहर में 497, जिला अस्पताल हनुमानगढ़ टाउन में 439 तथा एसडीएच नोहर में 346 महिलाओं को एफसीएम उपचार उपलब्ध कराया गया।
उपचार के बाद भी जारी है निगरानी
आरसीएचओ डॉ. सुनील विद्यार्थी ने बताया कि एफसीएम उपचार प्राप्त करने वाली महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अब तक 1819 महिलाओं की उपचार के लगभग 30 दिन बाद हीमोग्लोबिन फॉलोअप जांच की जा चुकी है। इस प्रक्रिया से उपचार की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के साथ-साथ आवश्यकता पडऩे पर आगे की चिकित्सा भी सुनिश्चित की जा रही है। गर्भवती महिलाओं से अपील की कि वे निर्धारित तिथियों पर अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में नियमित प्रसव पूर्व जांच अवश्य करवाएं। उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय पर जांच और आवश्यक उपचार लेने से एनीमिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है तथा सुरक्षित मातृत्व का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।




