‘पढ़ो राजस्थान’ मिशन के तहत स्कूलों में सातवां कालांश रीडिंग पीरियड अनिवार्य
‘पढ़ो राजस्थान’ मिशन के तहत 7वें कालांश में रीडिंग पीरियड अनिवार्य, नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश
बीकानेर। माध्यमिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर के निदेशक ललित कुमार ने ‘पढ़ो राजस्थान’ मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश के सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारियों, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों एवं समग्र शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों में बुनियादी साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान, पठन कौशल एवं अभिव्यक्ति क्षमता का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है।
निर्देशों के तहत विद्यालयों में प्रतिदिन सातवें कालांश को रीडिंग पीरियड के रूप में निर्धारित किया गया है। इसका नियमित संचालन बिना किसी अपवाद के अनिवार्य होगा। रीडिंग पीरियड का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तक पढ़ाना नहीं, बल्कि पढ़ी गई सामग्री को समझने, नए शब्द सीखने, विचार व्यक्त करने तथा विषयवस्तु पर चर्चा करने के अवसर उपलब्ध करवाना है।
सप्ताह में पांचों दिन होंगी अलग-अलग गतिविधियां
रीडिंग पीरियड के दौरान सोमवार को सस्वर पठन, मंगलवार को युग्मित पठन, बुधवार को कहानी कार्ड, गुरुवार को चित्र बनाओ एवं बताओ तथा शुक्रवार को मौन पठन गतिविधि आयोजित की जाएगी। शिक्षक विद्यार्थियों की आयु, पठन स्तर और उपलब्ध सामग्री के अनुसार गतिविधियों का चयन करेंगे। प्रत्येक विद्यार्थी को सप्ताह में कम से कम एक बार सस्वर पठन का अवसर देना सुनिश्चित किया जाएगा।
30 से 35 मिनट का होगा रीडिंग पीरियड
रीडिंग पीरियड के प्रभावी उपयोग के लिए 30 से 35 मिनट की समय-सारणी निर्धारित की गई है। इसमें पांच मिनट पूर्व विषय चर्चा, पांच मिनट नवीन पठन सामग्री का चयन, 15 से 20 मिनट निर्धारित पठन गतिविधि, पांच मिनट आपसी चर्चा तथा पांच मिनट नए शब्दों एवं विचारों को साझा करने के लिए रखे जाएंगे। पठन के दौरान आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को शिक्षक मार्गदर्शन अथवा सहपाठी के सहयोग से पढ़ने का अवसर दिया जाएगा।
पठन सामग्री का चयन विद्यार्थियों के स्तर के अनुसार
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पाठ्यपुस्तकों को रीडिंग पीरियड की मुख्य सामग्री के रूप में उपयोग नहीं किया जाए। विद्यार्थियों के स्तर एवं रुचि के अनुसार बाल साहित्य, चित्र पुस्तकें, कहानी, कविता, समाचार-पत्र तथा अन्य उपयुक्त सामग्री उपलब्ध करवाई जाए। शिक्षक ऐसी सूची तैयार करेंगे, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी को सप्ताह में कम से कम एक बार सस्वर पठन का अवसर मिल सके। पठन गतिविधियों का रिकॉर्ड शिक्षक डायरी में दर्ज करना होगा।
अभिभावकों की भागीदारी भी होगी सुनिश्चित
विद्यार्थियों में घर पर पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए उन्हें अपनी लिखी कहानी, कविता, अनुभव अथवा रोचक जानकारी कक्षा में प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। शिक्षक विद्यार्थियों के पठन की संक्षिप्त वीडियो रिकॉर्डिंग अभिभावकों के साथ साझा करेंगे तथा अभिभावकों को प्रतिदिन कुछ समय बच्चों को पढ़ने और सुनने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
नियमित मॉनिटरिंग एवं रिकॉर्ड संधारण के निर्देश
‘पढ़ो राजस्थान’ मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विद्यालय स्तर पर दैनिक गतिविधियों, सस्वर पठन रजिस्टर, विद्यार्थियों की प्रगति तथा पठन सामग्री की उपलब्धता की नियमित जांच की जाएगी। संबंधित अधिकारी अपने क्षेत्र के विद्यालयों में निर्देशों की समीक्षा एवं मॉनिटरिंग करेंगे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित गतिविधियों से विद्यार्थियों के वास्तविक पठन व्यवहार और समझने की क्षमता में सुधार दिखाई दे।
निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ‘पढ़ो राजस्थान’ मिशन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी दिशा-निर्देशों की गंभीरता से पालना सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों में नियमित पठन की आदत विकसित होने के साथ उनकी समझ, शब्द-भंडार, अभिव्यक्ति एवं चिंतन क्षमता का भी विकास हो सके।
