मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय
मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना में ऋण सीमा 50 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 01 करोड़ रुपये
जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कृत संकल्पित है। प्रदेश सरकार ने बजट 2026— 27 में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना के तहत अब महिलाओं को मिलने वाले ऋण की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये किया है। इस निर्णय से राज्य की महिलाओं को अपने व्यवसाय और स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी। बढ़ी हुई ऋण सीमा से महिला उद्यमियों को नए उद्योग स्थापित करने, मौजूदा व्यवसाय का विस्तार करने तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार का यह कदम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योजना के तहत पात्र महिला उद्यमियों को विभिन्न क्षेत्रों में व्यवसाय शुरू करने या विस्तार के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान किया जाता है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक महिलाएं उद्यमिता से जुड़ें और राजस्थान में महिला नेतृत्व वाले उद्योगों की संख्या में वृद्धि हो। इस पहल से न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि राज्य में रोजगार सृजन और समग्र विकास को भी गति मिलेगी।
यह योजना महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए संचालित की जा रही है, जिसके तहत महिला उद्यमियों को बैंकों के माध्यम से अनुदान युक्त ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार क्षेत्र में नए उद्यम स्थापित कर सकें या अपने स्थापित उद्यम का विस्तार कर सकें। यह योजना वित्तीय वर्ष 2028-29 (31 मार्च 2029) तक प्रभावी रहेगी।
यह हैं योजना अंतर्गत पात्रता, अनुदान व ऋणदात्री संस्थाएं
योजना अंतर्गत पात्र महिला आवेदक एसएसओ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। व्यक्तिगत महिला आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना आवश्यक है तथा आवेदक का राजस्थान का मूल निवासी होना अनिवार्य है। इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूह, महिला प्रोपराइटरशिप फर्म, महिला पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप, वन पर्सन कंपनी तथा प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां भी निर्धारित शर्तों के अनुसार योजना का लाभ ले सकती हैं।
योजना अंतर्गत राष्ट्रीयकृत वाणिज्यिक बैंक, आरबीआई द्वारा प्राधिकृत निजी क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक व अनुसूचित स्मॉल फाइनेंस बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राजस्थान वित्त निगम, सिडबी तथा केंद्रीय सहकारी बैंक ऋण प्रदान कर सकते हैं। योजना अंतर्गत कुल परियोजना लागत पर 25 प्रतिशत तक ऋण अनुदान (सब्सिडी) दिया जाता है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विधवा, परित्यक्ता, हिंसा से पीड़ित तथा दिव्यांग श्रेणी की महिलाओं को 30 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाता है।
रहेंगी अपात्रता की शर्तें
योजना अंतर्गत मांस, मदिरा व मादक पदार्थों से बने उत्पादों का निर्माण व विक्रय, विस्फोटक पदार्थ, परिवहन वाहन जिसकी ऑन रोड कीमत राशि 10 लाख रुपये से अधिक हो, पुनःचक्रित न किये जा सकने वाले पॉलीथीन व पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक उत्पाद व भारत सरकार / राज्य सरकार द्वारा समय पर प्रतिबंधित उत्पाद / गतिविधियां अपात्रता की शर्तों के अधीन हैं।
