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आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है: बाबूलाल जुनेजा

आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है: बाबूलाल जुनेजा

स्वस्थ जीवन शैली के प्रति जागरूक तथा रोगमुक्त समाज के निर्माण में वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर की पहल

टिब्बी में आयुर्वेद-नेचुरोपैथी चिकित्सा शिविर आयोजित

165 मरीजों ने उठाया निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ


टिब्बी। आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से आमजन को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने तथा रोगमुक्त समाज के निर्माण के लिए एसकेडी यूनिवर्सिटी में संचालित वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर के तत्वावधान में मंगलवार को टिब्बी स्थित श्री सिद्धि विनायक शिक्षण संस्थान में निःशुल्क आयुर्वेद-नेचुरोपैथी चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 165 मरीजों की स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श तथा प्राकृतिक उपचार सेवाओं का लाभ प्राप्त किया।

शिविर का शुभारंभ श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर के संस्थापक बाबूलाल जुनेजा, उपखंड अधिकारी सत्यनारायण सुथार, एडीजे अनुभव सिडाना, वरिष्ठ भाजपा नेता महंगा सिंह ढिल्लों, फूडग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सेखों, बलवीर सिंह राहड़, कलवंत सुथार, सुधीर गोदारा, संस्था निदेशक गौरी शंकर कल्याणी, वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. कृष्ण झाझड़िया, व्यापार मंडल अध्यक्ष विजय वर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों द्वारा एवं रिबन काटकर किया गया। शिविर का मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेंद्र सैनी के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में वरिष्ठ चिकित्सकों डॉ. नवनीत भारद्वाज, डॉ. राकेश बगड़िया एवं डॉ. रोहित कादयान ने मरीजों की निःशुल्क जांच कर आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से उपचार संबंधी परामर्श प्रदान किया। शिविर में किडनी एवं लीवर रोग, हृदय संबंधी समस्याएं, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, थायराइड, मोटापा, जोड़ों एवं घुटनों का दर्द, रीढ़ की समस्याएं, स्लिप डिस्क, नसों के रोग, अस्थमा, अनिद्रा, मिर्गी सहित विभिन्न दीर्घकालिक एवं जीवनशैली जनित रोगों के संबंध में विशेष परामर्श दिया गया।

चिकित्सकों ने मरीजों को उनकी स्वस्थ जीवन शैली के प्रति जागरूक  कर संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, योगाभ्यास एवं प्राकृतिक उपचार पद्धतियों को अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने की समग्र जीवन पद्धति हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थापक बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन एवं वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणाली है, जो स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अनियमित खान-पान, तनावपूर्ण जीवनशैली एवं शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण अनेक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोगों को अपनी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव लाकर स्वास्थ्य के प्रति सजग होना चाहिए।

उपखंड अधिकारी सत्यनारायण सुथार ने शिविर की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर आमजन के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं तथा समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एडीजे अनुभव सिडाना ने कहा कि बदलती जीवनशैली एवं बढ़ते मानसिक तनाव के दौर में आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा लोगों को स्वस्थ, संतुलित एवं रोगमुक्त जीवन प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो रही है।

अतिथिगणों ने महर्षि वाग्भट के नाम पर संचालित वाग्भट वैलनेस एवं आयुष रिसर्च सेंटर की सराहना करते हुए कहा कि संस्था भारतीय चिकित्सा परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य कर रही है।

वैलनेस समन्वयक एवं शिविर प्रभारी अनिल जांदू ने बताया कि संस्था द्वारा समय-समय पर निःशुल्क चिकित्सा शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम एवं परामर्श शिविर आयोजित कर लोगों को आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य रोगों की रोकथाम एवं स्वास्थ्य संरक्षण है।

शिविर के सफल संचालन एवं व्यवस्थाओं में एचओडी जयवीर सिंह, विपणन कार्यकारी विकास भादू, मलकीत सिंह, औषधि विशेषज्ञ राजकुमार, पूजा गौड़, विजय, सुनील प्रजापत, रवि, लोकेश, शिवानी, हरनूर, मंजू, सपना, पिंकी, वंदना, स्नेहा, खुशबू, किरणपाल सहित नर्सिंग एवं आयुष पैरामेडिकल विभाग के विद्यार्थियों तथा वाग्भट टीम के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित नागरिकों ने इस जनहितकारी पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे स्वास्थ्य शिविरों के नियमित आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की। शिविर में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति बढ़ते जनविश्वास को भी प्रदर्शित किया।

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