शिक्षा विभाग एवं स्कूल संचालक हुए आमने सामने
शिक्षा संबलन के तहत निजी विद्यालयों की प्रस्तावित जांच के विरोध में स्कूल संचालक हुए लामबंद,
15 जुलाई को ब्लॉक के समस्त स्कूल रहेंगे बंद, मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम व सीबीईओ को सौंपा ज्ञापन
टिब्बी। एस.आर.एस. प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, उपशाखा टिब्बी की सोमवार को स्थानीय एसएचके स्कूल में डॉ मनीष सहारण की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में सभी स्कूल संचालकों ने एकजुटता दिखाते हुए शिक्षा संबलन कार्यक्रम के तहत निजी विद्यालयों की प्रस्तावित विशेष जांच का विरोध करते हुए संगठन के शिक्षा बचाओ स्कूल बचाओ के आह्वान पर 15 जुलाई को समस्त स्कूल बंद रखने के निर्णय का समर्थन किया और स्कूल संचालकों द्वारा जिला स्तर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का निर्णय लिया। वक्ताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा गैर सरकारी स्कूलों के लिए जारी आदेश तुगलकी फरमान है। शिक्षा संबलन के नाम पर विद्यालयों के हितों को नजर अंदाज कर केवल परेशान किया जा रहा। जो गैर सरकारी स्कूल संचालक बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके पश्चात उपशाखा के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी व सीबीईओ टिब्बी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा 3 जुलाई 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार राजएप के माध्यम से शिक्षा संबलन कार्यक्रम के तहत निजी शिक्षण संस्थाओं की विशेष जांच प्रस्तावित की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि शिक्षा संबलन योजना मूल रूप से राजकीय विद्यालयों के उन्नयन एवं मूल्यांकन के लिए संचालित की जाती है, जबकि निजी विद्यालयों के विकास हेतु राज्य सरकार की ओर से कोई ऐसी योजना संचालित नहीं है। ऐसे में निजी विद्यालयों को इस योजना के दायरे में शामिल करना उचित नहीं है।
एसोसिएशन ने कहा कि निजी शिक्षण संस्थाएं पूर्णतः स्वायत्तशासी हैं और बिना किसी सरकारी अनुदान के अपने संसाधनों से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। राजस्थान में लगभग 33 हजार निजी विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, जिनमें अधिकांश सीमित संसाधनों के साथ संचालित होते हैं।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि निजी विद्यालयों का आरटीई के अंतर्गत प्रतिवर्ष भौतिक सत्यापन किया जाता है, जिसके आधार पर ही भुगतान किया जाता है। ऐसे में बार-बार निरीक्षण एवं अतिरिक्त जांच की प्रक्रिया से विद्यालयों का समय प्रशासनिक कार्यों में व्यतीत होगा और वे अपने मूल शैक्षणिक उद्देश्य से भटक जाएंगे।
एसोसिएशन ने राज्य सरकार से मांग की है कि शिक्षा संबलन योजना के तहत निजी विद्यालयों की प्रस्तावित जांच संबंधी आदेश को वापस लिया जाए तथा निजी शिक्षण संस्थाओं को अनावश्यक प्रशासनिक बोझ से राहत प्रदान की जाए, ताकि वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रसार में अपना योगदान निरंतर देते रहें।
इस मौके पर जिला संगठन मंत्री राजेश कुमार मिढ़ा, जिला महासचिव अशोक सुथार, हनुमानगढ़ तहसील अध्यक्ष विजय सिंह चौहान, विवेक भार्गव, दीपक कश्यप सहित अनेक जिला कार्यकारिणी सदस्य, पूर्व तहसील अध्यक्ष अनिल गोदारा, कार्यकारी जिलाध्यक्ष बलवीर सिंह राहड़, गोविंद मूंड, रामकुमार सुथार, ढुंकल राम देहड़ू, ओमप्रकाश वर्मा, राजेश नेहरा, घनश्याम मुद्गल, अब्दुल खालिक, सुरेन्द्र गोदारा, जयप्रकाश गोस्वामी, ओपी शर्मा, विनोद शर्मा, धर्मपाल, जयपाल लदोइया, महावीर गिल्ला, विनोद थोरी, बनवारी सिहाग, भागीरथ ढूकिया, मनिंद्र सिंह, गुरनाम सिंह, राजेंद्र सिंह, पवन कुमार, गुलाब सिंह, संदीप बेलान, आदि सहित अनेक स्कूल संचालक मौजूद रहे।


