जल संरचनाओं के लिए कृषि विभाग ने जारी किए निर्देश
डिग्गी एवं फार्म पॉण्ड में सुरक्षा उपाय होंगे अनिवार्य, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
जल संरचनाओं में डूबने की दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए कृषि विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश
हनुमानगढ़। डिग्गी, फार्म पॉण्ड (खेत तलाई) एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं में डूबने की दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा जन एवं पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग ने व्यापक सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए हैं। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं लाभार्थियों को इन निर्देशों की तत्काल प्रभाव से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक डिग्गी, फार्म पॉण्ड एवं अन्य जल संचयन संरचना के चारों कोनों पर पर्याप्त लंबाई की मजबूत रस्सी स्थायी रूप से गाड़े गए खूंटों से सुरक्षित रूप से बांधी जाएगी। रस्सी का एक सिरा पानी में छोड़ा जाएगा, ताकि किसी व्यक्ति के पानी में गिरने की स्थिति में वह रस्सी का सहारा लेकर सुरक्षित बाहर निकल सके। इसके साथ ही प्रत्येक जल संरचना में कम से कम 1 से 2 नए अथवा पुरानी ट्यूब में हवा भरकर ‘लाइफ सेविंग फ्लोट’ के रूप में रस्सी से बांधकर हमेशा पानी में उपलब्ध रखना अनिवार्य होगा।
दो फीट ऊंची सुरक्षा दीवार/ बाड़ एवं चेतावनी बोर्ड जरूरी
जल संरचनाओं के चारों ओर न्यूनतम 2 फीट ऊंची प्लास्टरयुक्त सुरक्षा दीवार का निर्माण कर उसके ऊपर जाली, कांटेदार तार अथवा परिस्थितियों के अनुरूप अन्य उपयुक्त सुरक्षा बाड़ लगाना सुनिश्चित किया जाएगा। स्थानीय परिस्थितियों एवं आवश्यकता के अनुसार करौंदा, खैरी, बांस, डंडा थोर, नागफणी आदि कांटेदार पौधों का उपयोग वानस्पतिक सुरक्षा बाड़ (Live Fence) के रूप में भी किया जा सकेगा।
प्रत्येक डिग्गी, फार्म पॉण्ड एवं अन्य जल संचयन संरचना के निर्माण के बाद उसके समीप स्पष्ट एवं दृष्टिगोचर स्थान पर लाल रंग में ‘सावधान/खतरा, गड्ढा गहरा है, बच्चों को दूर रखें’ अंकित चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य किया गया है।
सुरक्षित आवागमन के लिए सीढ़ी एवं रस्सी की व्यवस्था
स्थायी जल संरचनाओं में सुरक्षित आवागमन के लिए आवश्यकता के अनुसार सीढ़ियों की व्यवस्था की जाएगी। वहीं प्लास्टिक लाइनिंग वाली डिग्गियों में कृषक की सुविधा के अनुसार मजबूत प्लास्टिक रस्सी, लकड़ी अथवा लोहे की सीढ़ी स्थापित की जाएगी, ताकि किसी आकस्मिक परिस्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने में सहायता मिल सके।
नई संरचनाओं में सुरक्षा प्रावधान पूरे किए बिना निर्माण पूर्ण नहीं माना जाएगा
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी नवीन डिग्गी, फार्म पॉण्ड एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं में निर्धारित सुरक्षा उपायों की पालना अनिवार्य होगी। सुरक्षा प्रावधानों की पूर्ण अनुपालना के बिना निर्माण कार्य को पूर्ण नहीं माना जाएगा तथा संबंधित विभागीय योजना के अंतर्गत अनुदान अथवा वित्तीय सहायता देय नहीं होगी।
वहीं पूर्व में निर्मित सभी डिग्गी, फार्म पॉण्ड एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं में भी संबंधित लाभार्थियों द्वारा इस आदेश के जारी होने की तिथि से दो माह के भीतर निर्धारित सुरक्षा उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएंगे।
नियमित निरीक्षण एवं जियो-टैग फोटो अपलोड करने के निर्देश
सुरक्षा उपायों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाएगा। की गई कार्यवाही एवं निरीक्षण की एकीकृत पाक्षिक प्रगति रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में जिला स्तर से कृषि आयुक्तालय को भेजी जाएगी। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा उपाय स्थापित पाए जाने वाली संरचनाओं के जियो-टैग युक्त फोटोग्राफ राज किसान साथी पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
लाभार्थियों की होगी सुरक्षा उपायों के रखरखाव की जिम्मेदारी
विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सुरक्षा उपायों की स्थापना के साथ-साथ उनके नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित लाभार्थी/उपयोगकर्ता की होगी। संबंधित पंचायत, कृषि विभाग, ब्लॉक एवं जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर निरीक्षण कर निर्देशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित की जाएगी।
पालना करने वालों को प्रशस्ति-पत्र, लापरवाही पर नोटिस एवं कार्रवाई
विभाग ने सकारात्मक पहल के रूप में निर्धारित सुरक्षा उपायों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने वाले लाभार्थियों को सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) के माध्यम से प्रोत्साहन स्वरूप प्रशस्ति-पत्र प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। वहीं जिन लाभार्थियों द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपाय स्थापित नहीं किए गए हैं, उन्हें नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित करवाए जाएंगे।
निर्देशों के क्रियान्वयन में यदि किसी नवीन निर्माण में निर्धारित सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित नहीं किए जाते हैं अथवा विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा निर्देशों की पालना में लापरवाही बरती जाती है, तो संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
कृषि विभाग का यह कदम प्रदेश में जल संचयन संरचनाओं को सुरक्षित बनाने, विशेषकर बच्चों एवं पशुधन को डूबने की दुर्घटनाओं से बचाने तथा किसानों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
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