वंशिका ने किया गौरवान्वित
जांभाणी संस्कार ज्ञान परीक्षा में टिब्बी की वंशिका ने हासिल किया द्वितीय स्थान
10 वर्षीय वंशिका ने शत-प्रतिशत अंक प्राप्त कर बढ़ाया हनुमानगढ़ जिले का गौरव
जांभाणी शब्दवाणी, संस्कार, जीवदया एवं पर्यावरण संरक्षण की शिक्षाओं से वंशिका का जुड़ाव प्रेरणादायी
टिब्बी। जांभोजी महाराज की जन्मस्थली पीपासर में आयोजित राष्ट्रीय महासम्मेलन में टिब्बी ब्लॉक के गांव शेरेकां की 10 वर्षीय वंशिका बिश्नोई ने जांभाणी संस्कार ज्ञान परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वंशिका की इस उपलब्धि से हनुमानगढ़ जिले को गौरवान्वित किया है।
श्री जम्भेश्वर पर्यावरण एवं जीवरक्षा प्रदेश संस्था राजस्थान की ओर से जांभोजी महाराज की 575वीं अवतार वर्षगांठ, एक वर्षीय हीरक जयंती एवं समाज सुधार भारत यात्रा के समापन अवसर पर आयोजित परीक्षा में वंशिका ने 14 रचनाओं की मौखिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
वंशिका टिब्बी तहसील के शेरेकां गांव निवासी सुशील कुमार सहारण की पुत्री है। उसका ननिहाल लखासर में है। खास बात यह है कि ननिहाल अथवा किसी अन्य गांव जाने पर भी वंशिका अपनी संस्कारमयी दिनचर्या को निरंतर बनाए रखती है। वह प्रतिदिन सुबह सफेद वस्त्र धारण कर जांभेश्वर मंदिर पहुंचती है तथा हवन में जांभाणी शब्दवाणी का वाचन करती है।
वंशिका का किया सम्मान
वंशिका की उल्लेखनीय उपलब्धि पर संस्था के संरक्षक एवं मुकाम पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी रामानंदजी महाराज, प्रदेश अध्यक्ष रामरतन बिश्नोई, प्रदेशमंत्री अनिल बिश्नोई सहित मंचासीन अतिथियों ने माल्यार्पण कर उसका सम्मान किया। इस अवसर पर उसे 5,100 रुपये नकद, प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया।
कम उम्र में जांभाणी शब्दवाणी, संस्कार, जीवदया एवं पर्यावरण संरक्षण की शिक्षाओं से वंशिका का जुड़ाव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है। पीपासर में आयोजित इस परीक्षा ने यह संदेश दिया कि संस्कार केवल परीक्षा का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की संस्कृति हैं।
